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मासूमों के टॉर्चर रूम बाड़मेर में खुल चुके हैं?

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रिपोर्ट-दिलीप लोहार बाङमेर

निजी शिक्षण संस्थाओं की वजह से शिक्षा विभाग की “धूड़” उड़ रही हैं। गैर-शिक्षण पेशे के लोग जो शिक्षा की इथिक्स, मोरल सबसे अंजान हैं वो शिक्षा को व्यापार बनाकर राजनीतिक संरक्षण से अपनी दुकान जमाकर सैकड़ो नहीं बल्कि हजारों मासूमो को “चीन” में अल्पसंख्यक कैम्प की तरह टॉर्चर हाउस में रखे हैं। पीटने वाले स्वयम्भू योग्य शिक्षक खुद के राजनीतिक वक्त से बामुश्किल कुछ समय बच्चों को *शिक्षण पिटाई प्रताड़ना* के लिए निकाल पाते हैं।

राजनीतिक संरक्षण प्राप्त इस तरह के शिक्षा व्यवसाय के इन एजेंट्स की पकड़ विधायकों से लगाकर ऊंचे स्तर तक हैं।
मासूम बच्चों के साथ ‘ये दानव” बने कथित गुरु शिक्षक का चोला ओढ़कर बैठे हैं और स्कूल की बन्द दीवारों में मासूमों को प्रताड़ित कर रहे हैं।

बाड़मेर के बलदेवनगर में भी ऐसे ही एक टॉर्चर स्कूल की वजह से बाड़मेर जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग की इज्ज़त का कचूमर निकल रहा हैं। डूंगर विद्यापीठ नामक कथित टॉर्चर रूम में लगातार एक बच्चे को 5 घण्टों तक प्रताड़ित कर उसे मारापीटा गया। स्कूल के बाद बच्चा घर पहुंचा तो उसको रोते देख परिजनों ने उससे पूछा कि “स्कूल में हुआ क्या, जो वह इस तरह से रो रहा हैं? इस पर बच्चा कुछ नहीं बोला और अपने शरीर पर जगह जगह लोहे कर पाइप से मारपीट के निशानों को दिखाया।
घरवाले उसको इस हाल में देखकर परेशान हो गए। उन्होंने स्कूल संचालक को फोन किया तो परिजनों के अनुसार उसका जवाब था “जो बिगाड़ सको वो बिगाड़ लेना, सरकार हमारी हैं”।
बताया जा रहा हैं कि स्कूल संचालक जिले के एक विधायक का चरणदास हैं। उसी की कृपा उसके राजनितिक परिवार पर बरस रही हैं। और शायद यही वजह हैं कि वो ‘कॉन्फिडेंट” हैं कि बच्चे की स्थिति इस प्रताड़ना में ज्यादा बिगड़ती और कोई अवांछित घटना होती तो भी निश्चित ही सरकार हमारी हैं कि आड़ में स्कूल का जल्लाद छुप जाता।

हालांकि, बाड़मेर के सदर थाने में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के मध्यस्थता के बाद मामला दर्ज हो चुका हैं लेकिन ‘जो करना हो कर लेना सरकार हमारी हैं, का असर जांच पर न पड़े’।
अगर दूषित जांच होती हैं तो यक़ीनन इस टॉर्चर हाउस स्कूल के छुपे जल्लादों को मासूमों पर इस तरह की प्रताड़ना बढ़ेगी। बच्चे इस प्रताड़ना को सहन कर पाएंगे या नहीं वो फ़ोटो देखकर आँकलन करें।

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