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मप्र के उपसचिव नियाज खान अब मुसलमान समाज की राजनीति करेंगे |

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सरस्वती द्विवेदी
भोपाल। विधानसभा सत्र के पहले दिन मध्यप्रदेश राज्य प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी एवं उपसचिव नियाज खान ने आग लगाने वाला बयान जारी कर दिया है। उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट जारी किए और मुसलमान समाज की राजनीति करने की कोशिश की। उन्होंने लिखा कि मुसलमानों को अपना नाम बदलकर हिंदुओं जैसा रख लेना चाहिए ताकि वो माॅब लिंचिंग जैसी घटनाओं से बच सकें। मध्यप्रदेश में मजिस्ट्रेट रहकर लोगों को न्याय दे चुके नियाज ने लिखा कि भारत में अब मुसलमानों को इंसाफ नहीं मिलता।

क्या लिखा है नियाज खान ने

राप्रसे अधिकारी नियाज खान अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम पर नॉवेल लिखकर चर्चा में आए थे। अब उन्होंने माॅब लिंचिंग पर अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए अपना नाम बदलने की ख्वाहिश जाहिर की है। शनिवार को उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट कर यह ख्वाहिश जाहिर की। परिवहन विभाग में उप सचिव खान ने लिखा कि वे पिछले 6 महीने से अपने उपन्यास ‘टेल ऑफ नॉक्टर्नल लवर’ और अपने लिए नया नाम ढूंढ़ रहे हैं, ताकि अपनी मुस्लिम पहचान छिपा सकें। कोई संस्था हमें बचाने में सक्षम नहीं है। इससे बेहतर है कि नाम बदल लिया जाए। नया नाम मुझे हिंसक भीड़ से बचाएगा। अगर मेरे पास टोपी, कुर्ता और दाड़ी नहीं हाेगी, तो भीड़ को अपना फेक नाम बताकर आसानी से निकल जाऊंगा।

मुसलमान समाज की राजनीति शुरू कर दी

मप्र शासन के उपसचिव नियाज खान ने मुसलमान समाज की राजनीति शुरू कर दी है। अपने समाज के लोगों में दहशत पैदल करके खुद नेता बन जाने का चलन भारत में काफी पुराना है। नियाज भी शायद यही रास्ता चुन रहे हैं। उन्होंने बॉलीवुड कलाकाराें काे भी समझाइश देते हुए लिखा कि मेरे समुदाय के कलाकारों को भी अपनी फिल्में बचाने के लिए अपना नाम बदलने के बारे में सोचना चाहिए। अब तो टॉप स्टार्स की फिल्में भी फ्लॉप होने लगी हैं। उन्हें इसका मतलब समझना चाहिए। अपने ट्वीट के बारे में खान ने कहा कि घटनाएं हो जाती हैं, पर किसी को इंसाफ नहीं मिलता। इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास कम हो रहा है। इस तरह की घटनाओं के खिलाफ बुद्धिजीवी लोगों को सामने आना होगा।

अब कार्रवाई होगी और नियाज खान का प्लान सफल हो जाएगा

बता दें कि नियाज खान के खिलाफ कार्रवाई तय है और यह शायद ट्वीट करने से पहले नियाज खान को पता भी था। राज्य प्रशासनिक सेवा का अधिकारी रहते हुए वो ना तो भारत की कानून व्यवस्था पर सवाल उठा सकते हैं और न्याय व्यवस्था की समीक्षा ही कर सकते हैं, जबकि नियाज खान ने भारतीय न्याय व्यवस्था की आलोचना कर दी है। पूर्व में वो खुद मजिस्ट्रेट पद पर रहते हुए न्याय प्रदाता रहे हैं। ऐसे में उनका इस तरह सवाल उठाना साफ जाहिर करता है कि नियाज खान ने यह सबकुछ प्लानिंग के तहत किया है।

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