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बैंक ऑफ बड़ौदा और सेफ सिक्योर सर्विसेस लगा रही गार्डो को कई का चूना

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अनूपपुर निर्मल सिंह
हमेशा सुर्खियों में रहने वाला चचाई बैंक आफ बडौदा एक बार फिर एटीएम गार्डो
के साथ हो रहे अत्याचारों के कारण सुर्खियों में आ गया मामला मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 530 किलोमीटर दूर अनूपपुर जिले का है जिले में स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा चचाई के पूर्व मैनेजर अनुराग दफारे एवं सेफ सिक्योर के सुपरवाइजर शत्रुंजय द्विवेदी सतना और फील्ड ऑफिसर नवसाद के कारनामों का है जिन्होंने 2018 में एटीएम में विगत 12 सालों से कार्यरत़ एक एटीएम गार्ड को अकारण बिना किसी कारण के नौकरी से निकाल दिया साथ साथ मानसिक रूप से प्रताड़ित किया मैनेजर अनुराग दफारे की कार्यशैली पर सवालिया निशान यह है कि शाखा प्रबंधक ने अपने वरिष्ठ अधिकारीओ को एक मेल किया जिस पर यह था कि चचाई एटीएम गार्ड
प्रभु दयाल द्विवेदी विगत 23 अप्रैल 2018 से 27 अप्रैल 2018 तक अपने कार्यस्थल पर अनुपस्थित थे जब की सत्यता यह है कि प्रभु दयाल द्विवेदी 23 अप्रैल 2018 से लेकर 30 अप्रैल 2018 तक अपने कार्यस्थल पर उपस्थित थे बल्कि मैनेजर ने 27 अप्रैल 2018 को एटीएम गार्ड


प्रभु दयाल द्विवेदी से एटीएम की चाबियां ले ली थी शाखा प्रबंधक अनुराग दफारे के द्वारा सेफ सिक्योर सर्विसेस को किए गए मेल से यह स्पष्ट होता है कि एटीएम गार्ड
प्रभुदयाल दुबेदी लगातार अपने कार्यस्थल पर उपस्थित थे एटीएम
गार्ड प्रभु दयाल द्विवेदी की माने तो एटीएम गार्ड के पुत्र ने 2018 में किसी युवती के साथ प्रेम विवाह कर लिया था प्रेम विवाह के उपरांत युवती के परिजनों के द्वारा अपने संबंधित थाने में एक शिकायत पत्र दिया गया जिस बात की जांच के लिए संबंधित थाना चचाई आया और युवक एवं -युवती से पूछताछ की पूछताछ में यह पाया गया कि दोनों ने अपनी मर्जी से शादी की है परंतु अनुराग दफारे शाखा प्रबंधक चचाई के द्वारा जबरन ही कुछ फर्जी मेल शाखा प्रबंधक भोपाल को किए गए और युवक एवं -युवती के प्रेम विवाह को एटीएम से जोड़कर गार्ड प्रभु दयाल द्विवेदी
को निकाल दिया गया
जबकि युवती ने इस बात के लिखित शिकायत शहडोल संभाग के पुलिस महानिरीक्षक को की थी कि मेरे पिता मेरे पति के खिलाफ एक फर्जी शिकायत पत्र पेश किए हैं जबकि हम दोनों ने अपनी मर्जी से शादी की थी परंतु अनुराग दफारे एवं सेफ सिक्योर के कुछ कर्मियों ने तानाशाही दिखाते हुए विगत 12 सालों से कार्य कर रहे एटीएम गार्ड
प्रभु दयाल द्विवेदी को नौकरी से निकाल दिया बैंक ऑफ बड़ौदा के पूर्व के कैमरे खागाले जाए तो यह देखा जा सकता है कि शाखा प्रबंधक चचाई अनुराग दफारे एटीएम गार्डों से किस तरीके का काम ले रहे थे शाखा प्रबंधक गार्डों से चाय पानी झाड़ू तक लगाते थे यहां तक कि वह अपने घर में बुलवाकर गार्डों से काम करवाते थे

सेफ सिक्योर सर्विसेस लगा रही गार्डो को चुना

सिक्योर सर्विसेज गार्डो को सैलरी के नाम पर महज ₹7000 ही दे रही जबकि गार्डों के खाते में ₹15000 की सैलरी आती है प्राप्त जानकारी के अनुसार नवसाद फील्ड ऑफिसर एवं शत्रुंजय द्विवेदी सुपरवाइजर के द्वारा मिलीभगत कर गार्डों को डरा धमका कर यह कहा जाता है कि आपके खाते में ₹15000 की सैलरी आएगी यदि आपको यहां पर कार्य करना है तो ₹8000 आप अपने खाते से निकालकर सुपरवाइजर के खाते मैं डालेंगे अब तक इन्होंने कई लाखों का वारा न्यारा किया होगा अब तो आने वाली जांच ही यह बताएगी कि सच्चाई क्या है
इस संदर्भ में गार्डों की माने तो जल्द ही इस बात की शिकायत पुलिस महानिदेशक भोपाल के साथ-साथ लेबर कोर्ट एवं प्रधानमंत्री कार्यालय में की जाएगी सेफ सिक्योर के कुछ लोगों से संपर्क किया गया तो उनके द्वारा कहा गया हमारे सीनियरओं ने जो कहा हमने वह किया हमें कुछ नहीं पता इसके बाद नवसाद एरिया मैनेजर से संपर्क किया गया तो उन्होंने स्पष्ट कह दिया कि साढे ₹7000 भुतही गार्डों की सैलरी आती है तो फिर गार्डों के खाते में आने वाली सैलरी ₹15000 कहां से आती है पर ₹8000 जो इनके द्वारा वापस लिए जाते हैं वह किस के खाते में जाते हैं अगर सुपरवाइजर के खाते को करार आ जाए तो स्पष्ट हो जाएगा कि सेफ सिक्योर किस प्रकार गार्डों के साथ छलावा कर रही है यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि आरोप में कितनी सच्चाई है

क्यों रहता है बैंक ऑफ बड़ौदा चचाई सुर्खियों में
केसीसी घोटाले में शाखा प्रबंधक गिरफ्तार, फर्जी दस्तावेजो के आधार पर बांटा लोन

अनूपपुर. जिले के थाना चचाई में स्थित बैंक ऑफ बडौदा में पदस्थ रहे शाखा प्रबंधक एस.पी. निम्बोलकर ने दलालो के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजो के आधार पर शाखा से ७० किलोमीटर दूर मैकलांचल के गांवो के कृषको को लोन बांटने के नाम पर हेरफेरी की मामले का खुलासा तब हुआ जब वसूली के लिये पहुंचे अधिकारियों को न तो पुख्ता दस्तावेज और न ही आवेदक मिले। ऋण पुस्तिका के नाम पर बांटे गये ऋण में दलालो की मिली भगत के आरोप भी लगते रहे। बैंक द्वारा पूर्व में ही शाखा प्रबंधक को निलंबित कर दिया गया था बाद में शाखा प्रबंधक के विरूद् पुलिस ने ४२०, ४६७, ४६८, ३४ आईपीसी के तहत मामला पंजीबद्घ किया जिसे १२ अक्टूबर को पुलिस ने गिरफ्तार कर १३ अक्टूबर को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लेेकर पूछताछ कर रही है।

फर्जी ऋण पुस्तिका का उपयोग

केसीसी के लिये जिस ऋण पुस्तिका का उपयोग किया गया है वह सब भी पूर्णत: फर्जी है केसीसी में कृषक का नाम और पता सही डला हुआ है बस तस्वीर और जमीन के आंकडो में हेर-फेर है। ज्ञान सिंह के पास पहुंचे अधिकारियों को ज्ञान सिंह ने असली ऋण पुस्तिका दिखलाई थी जिसमें उसकी वास्तविक फोटो लगी हुई थी तथा भूमि का रकवा ३ एकड २० डिसमिल दर्ज था जबकि बैेंक अधिकारियों के पास रखी ऋण पुस्तिका में यह रकवा ३२ एकड दर्ज था। इसी तरह दूसरे कृषकों के भी दस्तावेज कूट रचना कर तैयार किये गये।

किसानो नाम पर खेल

जिन आदिवासी कृषको के नाम पर केसीसी का खेल खेला गया था उनमें से एक ने भी कभी बैंक ऑफ बडौदा का नाम नही सुना कृषको में भागचंद के नाम पर ३ लाख रूपये जबकि रामबाई, रतन,तथा ज्ञान सिंह के नाम पर ५-५ लाख रूपये का लोन निकाला जा चुका है अपने जीवन काल में चचाई बडौदा बैंक को न देखने वाले आदिवासी कृषक इसी बैंक के कर्जदार हो गये है।

प्रबंधक ने खोले राज

पुलिस के गिरफ्त में आए एस.के. निम्बोलकर ने को बतलाया कि पूरे मामले में चार और भी व्यक्ति है जिनका नाम पुलिस की जांच अधूरी और प्रभावित होने की वजह से प्रकाशित नही किया जा रहा इनमें से दो बतौर दलाल तथा दो अन्य दूसरे व्यवसाय से है। साथ ही गिरफ्तार शाखा प्रबंधक ने सर्च रिपोर्ट देने वाले अधिवक्ता को भी पुलिस द्वारा अभयदान देने की बात कही गई।

इनका कहना है

केसीसी फर्जीवाडे में शाखा प्रबंधक को गिरफ्तार कर न्यायालय से रिमांड पर लिया गया है। पूछताछ में और भी खुलासा होगा।
ए.पी. सिंह सूर्यवंशी उपनिरीक्षक चचाई

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