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कैसे होती है ‘जरायम’ की दुनिया में दिल्ली पुलिस के जयराम की खुफियागिरी

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रई दिल्ली सरस्वती द्विवेदी
तस्वीरें गौर से देखें। ऐसा लगेगा कि एक अपराधी है दूसरा पुलिस वाला। बस, यही आपकी नजरों का धोखा है। ‘जरायम’ और ‘जयराम’.. वैसे तो अक्षरों के उलटफेर में मिलता जुलता शब्द। लेकिन दोनों के मायने असल में बिलकुल जुदा। जरायम यानी ‘अपराध की दुनिया’, जबकि जयराम दिल्ली पुलिस के वो हेड कॉन्स्टेबल हैं जिन्हें इजराइल की खुफिया ऐजेंसी मोसाद की तर्ज पर अपराधियों के बीच ऑपरेशन अंजाम देने में माहिर हैं। पिछले साल 2018 में ही एक दो

 


नहीं, बल्कि 200 से अधिक अपराध के केस अपनी खुफियागीरी से सुलझा डाले। इनमें 109 ऐसी संगीन वारदातें थीं जिसकी वजह से पिछले साल 2018 में ओटीपी (आउट ऑफ टर्न प्रमोशन) मिला।
यही वजह है कि इन्हें दिल्ली पुलिस का बहुरुपिया, तेज तर्रार खुफिया भी समझा जाता है। तमाम किस्से इनके हिस्से में हैं। जैसे एक चर्चित मर्डर केस को सुलझाने के लिए वेश बदलकर गैंग के बीच हफ्तों तक रहे और बदमाशों को भनक तक न लगी। जानिए, कौन है जयराम! क्या है इनके काम करने का अलहदा अंदाज!

ठेठ गांव की पृष्ठभूमि से जयराम
जयपुर के जयराम इन दिनों नॉर्थ वेस्ट जिले के नेताजी सुभाष प्लेस थाने में हेड कॉन्स्टेबल तैनात हैं। देखने में छरहरा बदन। चेहरे पर हल्की फुल्की दाढ़ी। जिस तरह की हुलिया है, उसे देखकर कोई नहीं कहेगा कि ये पुलिसवाला है। बस, इसी अंदाज से अपराधी खा जाते हैं गच्चा। बकौल जयराम, जयपुर के पास शाहपुर गांव की ठेठ पृष्ठभूमि से हैं। पिता गंगा सहाय यादव किसान थे। वे अब नहीं रहे। घर में बूढ़ी मां है। 2009 में दिल्ली पुलिस में भर्ती हुए। पहली पोस्टिंग एलके आडवाणी हाउस पर सिक्यॉरिटी में थी। वहां 5 साल तैनात रहे। थाने की पहली बार पोस्टिंग नेताजी सुभाष प्लेस थाने की मिली। तब से वहीं पर हैं।

जयराम के बहुरुपिया बनने के तरीके
सलून में जाकर सिर के एक हिस्से में गोल्डन कलर के बाल, टपोरी स्टाइल, बदमाशों जैसी बोली, घिसी पिटी और मैली कुचैली जींस, उसके ऊपर गोल गले की चमकीली टीशर्ट, पैरों में हवाई चप्पल। बस, इतनी सी साज सज्जा करके जयराम ने पिछले साल 22 मार्च को ग्राफिक डिजाइनर के चर्चित ब्लाइंड मर्डर को खोल दिया। हफ्ते भर से ज्यादा समय कई गैंग के बीच में मेंबर बनकर इसी अंदाज में रहे। मुखबिरों की मदद से बदमाशों की टोली में एंट्री पाई। उन्हीं के बीच एक दिन एक बदमाश दारू के नशे में शेखी बघारते हुए उगल बैठा कि उस छात्र का मर्डर मैंने कर दिया। यहीं से लीड मिलती रही।
कोडवर्ड के जरिए अपने सीनियर अफसरों को पल पल की अपडेट दी। एक महीने के भीतर इस केस के गुनहगार गिरफ्त में आ गए। इसके लिए स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच, जिले की यूनिटें लगी थीं। मगर जयराम ने घुसपैठ करके अफसरों की शाबाशी पा ली।
चोरी के साथ रेप करने वाला स्पाइडरमैन
इनकी खुफियागिरी के चर्चित केसों में से ही है स्पाइडनमैन की गिरफ्तारी। उसने दिल्ली में चोरी, लूट जैसी 53 घटनाओं को अंजाम देकर पुलिस की नाक में दम कर रखा था। हद तो तब हो गई जब स्पाइडरमैन रानीबाग में आधी रात को चोरी के इरादे से घुसा। घर में अकेली महिला को देख उसे बंधक बनाया, फिर रेप किया। कई घंटे तक उसके साथ रहा। पुलिस अफसरों की तरफ से तमाम टीम के साथ ही जयराम को भी लगाया। उन्हें कहा कि कुछ भी रात के समय हलचल हो, तुरंत शेयर करें। चूंकि फोन भी चोरी हो रहे थे। उन्हीं फोन को ट्रेस किए। अधिकतर नंबर जहांगीरपुरी में ही जाकर बंद हो जाते।
जयराम ने वेश बदला और जहांगीरपुरी की गलियों में गुंडे मवाली स्टाइल में रातें बिताईं। बिगड़ैलों के बीच घुलमिलकर केस की लीड निकाल ली। स्पाइडरमैन केस की तारीखों पर जाता। तभी एक दिन कोर्ट से बाहर निकलते ही दबोच लिया। केस का खुलासा हुआ। 60 लाख कैश की रिकवरी हुई। किलोभर सोना मिला जो गोल्ड लोन देने वाली कंपनी के यहां रखा था। एक अन्य केस कैब ड्राइवर को बंधक बनाकर उसकी हत्या फिर टुकड़े टुकड़े पीस करके फेंकने के आरोप में हकीम और उसकी गर्लफ्रेंड की गिरफ्तारी।

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