भाई-बहिनों ने मिलकर तालाबों पर हिलोरा समंदर

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रिपोर्ट-दिलीप लोहार

बालोतरा (बाड़मेर)
बालोतरा। हरियाली एकादशी को भाई बहिनों ने तालाब हिलोरने की वर्षो से चली आ रही परम्परा के अनुसार रविवार को महिलाओं ने तालाब पर जा कर उसकी विधि पूर्वक पूजा अर्चना की।

किटनोद की नाड़ी पर लोगो ने तालाब पूजन किया व तालाब हिलोरने की रस्म पुरी की एवं सुख शांति की कामना की। भाई बहिन के पवित्र बंधन को बाधें इस पावन पर्व को सभी जगह मनाते है। सूर्य की पहली किरण के साथ ही लोगो में जोश व उल्लास था, जो धीरे धीरे लोग तालाब पर पहुंचने शुरू हुए। तालाब पर भाई बहिनों को पंडित ने तालाब की पूजा अर्चना करवायी एवं घुघरी मातर का भोग लगाया गया। फिर एक दुसरे को पानी पीलाकर तालाब(समंदर) हिलोरा। उसके बाद भाईयों ने अपनी बहिनों को उपहार व व चुनरी ओढाकर आर्शिवाद दिया। तालाब पर पहुची बहिनों के तालाब हिलोरने के लिए लाए गये मटके आकर्षण रहें। मटकों पर उकेरी कलाकृति सबको लुभा रही थी। वहीं महिलाओं ने पारंपरिक राजस्थानी गीत गाकर उत्साह से समंदर हिलोरने की परंपरा का निर्वहन करते किया। तालाब पर 18 महिलाओं ने भाग लिया। इसके बाद रेहाण एवं प्रसादी का आयोजन भी किया गया।